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आयुष्मान योग में अक्षय तृतीया और परशुराम प्राकट्य उत्सव:जल से भरे कलश के दान करने से मिलेगा अक्षय पुण्य
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। इस बार 22 अप्रैल शनिवार को कृतिका नक्षत्र, आयुष्मान योग तथा वृषभ राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में अक्षय तृतीया तथा भगवान परशुराम का प्रकट उत्सव मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन जल से भरे कलश को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
पं. अमर डिब्बेवाला ने बताया कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में योगों का विशेष महत्व है। 27 योगों में से एक आयुष्मान योग अपने आप में विशेष इसलिए माना जाता है, क्योंकि इस योग में की गई धार्मिक क्रियाएं आयु को बढ़ाने वाली होती है। अक्षय तृतीया बड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की संयुक्त साधना करने से तथा पितरों के निमित्त दान करने से आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। वहीं अक्षय तृतीया की रात्रि में अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग में अपने इष्ट की साधना करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी। 22 अप्रैल को ही बृहस्पति का राशि परिवर्तन हो रहा है। मीन राशि से मेष राशि में बृहस्पति प्रवेश करेंगे। यह स्थिति भी अनुकूल मानी जाती है। सूर्य के साथ गुरु की युति श्रेष्ठ बताई गई है। इस दृष्टि से यह योग 12 वर्ष बाद बन रहा है। इसमें किया गया दान अक्षय बताया जाता है।
जल से भरे कलश का करें दान
वैशाख मास में भगवान शिव को जल चढ़ाने तथा गलंतिका बांधने एवं प्याऊ लगाने का विशेष पुण्य प्राप्त होता है, जो इस महीने में यह क्रिया नहीं कर पाते है। वे आखातीज पर ही शिव मंदिर पर गलंतिका बांध दें । जल से भरे कलश को ब्राह्मण को अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें तो यह अक्षय माना जाता है। इसके पुण्य से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया पर विधिवत धार्मिक क्रिया संपादित करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आर्थिक प्रगति और उन्नति के द्वार खुलते हैं। पितरों तथा भगवान विष्णु के निमित्त पूजन पाठ करना चाहिए तीर्थ पर भी दान देने की परंपरा है।